December 1, 2021
tatpurush samas

तत्पुरुष समास – परिभाषा, तत्पुरुष समास के प्रकार, 50 उदाहरण, सूत्र, अर्थ

Tatpurush Samas तत्पुरुष समास – परिभाषा, तत्पुरुष समास के प्रकार, 100+ उदाहरण, सूत्र, तथा अर्थ इस पृष्ठ में दिए गए हैं। सम्पूर्ण तत्पुरुष समास देखिये यहाँ। जैसे की हमने पिछले में समास में अव्ययीभाव समास के बाद अब तत्पुरुष समास है।

पिछले अध्याय

  1. तत्पुरुष समास के कितने भेद हैं?
  2. तत्पुरुष समास का 50 उदाहरण
  3. तत्पुरुष समास के भेद।
  4. तत्पुरुष समास को कैसे पहचाने?

तत्पुरुष समास – परिभाषा, तत्पुरुष समास के प्रकार, 50 उदाहरण, सूत्र, अर्थ

तत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वह समास, जिसका उत्तरपद या अंतिम पद प्रधान हो | अर्थात प्रथम पद गौण हो और उत्तरपद की प्रधानता हो |

जैसे – राजकुमार सख्त बीमार था | इस वाक्य में समस्तपद ‘राजकुमार’ जिसका विग्रह है – राजा का कुमार | इस विग्रह पद में ‘राजा’ पहला पद और  ‘कुमार’ (पुत्र) उत्तर पद है |

अब प्रश्न है – कौन बीमार था, राजा या कुमार ?
उत्तर मिलता है – कुमार स्पष्ट है कि उत्तरपद की ही प्रधानता है |

कुछ और उदाहरण देखते है –

राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है |
पॉकेटमार कपड़ा गया |
रामचरितमानस तुलसीकृत है |

अवयव की दृष्टि से तत्पुरुष समास के दो भेद है –

  1. व्यधिकरण तत्पुरुष
  2. समानाधिकरण तत्पुरुष

व्यधिकरण तत्पुरुष

वह तत्पुरुष, जिसमे प्रयुक्त पदों में से पहला पद कर्ताकारक का नहीं हो | ‘इस तत्पुरुष को’ केवल तत्पुरुष भी कहा जाता है | इस समास को पहले पद में लगे कारक चिह्नों के नाम पर ही पुकारा जाता है |

कर्ता’ और ‘सम्बोधन’ को छोड़कर बाकि सभी कारको से संबंद्ध तत्पुरुष समास बनाए जाते है | इसके निम्नलिखित प्रकार होते है –

  1. कर्म या द्वितीया तत्पुरुष : इसमें पद के साथ कर्म कारक के चिह्न (को) लगे रहते है| जैसे –

गृहागत = गृह को आगत
पॉकेटमार = पॉकेट को मारनेवाला आदि |

  1. करण  तृतीया तत्पुरुष : इसके पहले पद के साथ करण कारक  विभक्ति (से/द्वारा) लगी हो | जैसे –

कष्टसाध्य = कष्ट से साध्य
तुलसीकृत = तुलसी द्वारा कृत आदि |

  1. सम्प्रदान या चतुर्थी तत्पुरुष : जिसके प्रथम पद के साथ सम्प्रदान कारक के चिह्न (को/के लिए) लगे हों | जैसे –

देशार्पण = देश के लिए अर्पण |
विद्यालय = विद्या के लिए आलय आदि |

  1. अपादान  पंचम तत्पुरुष : जिसका प्रथम पद अपादान के चिह्न  युक्त हो |

जैसे – पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट
देशनिकाला = देश से निकाला आदि |

  1. संबंध तत्पुरुष या षष्ठी तत्पुरुष : जिसके प्रथम पद के साथ अधिकरण के चिन्ह (का, के, की) लगे हो | जैसे –

राजकुमार = राजा का कुमार
पराधीन = पर के अधीन आदि |

  1. अधिकरण या सप्तमी तत्पुरुष : जिसके पहले पद के साथ अधिकरण के चिह्न (में, पर) लगे हो | जैसे –

कलाप्रवीण = कला में प्रवीण
आपबीती = आप पर बीती आदि |

समानाधिकरण तत्पुरुष

जिस तत्पुरुष के सभी पदों में समान कारक (कर्ता) पाया जाय | इस समास के अंतर्गत निम्नलिखित समास आते है –

  1. कर्मधारय समास (Appositional) : समानाधिकरण तत्पुरुष का ही दूसरा नाम ‘कर्मधारय’ जिस तत्पुरुष समास के समस्तपद  समानाधिकरण हो अर्थात विशेष-विशेषण भाव को प्राप्त हो, कर्ता कारक के हो और लिंग वचन में भी समान हो | दूसरे शब्दो में वह समास जिसमे विशेषण तथा विशेष्य अथवा उपमान तथा उपमेय का मेल हो और विग्रह करने पर दोनों खंडो में एक ही कर्ताकारक  विभक्ति रहे |

कर्मधारण समास की निम्नलिखित स्थितियों होती है-

(a) पहला पद विशेषण दूसरा विशेष्य : महान पुरुष = महापुरुष

पक्व अन्न = पकवान्न

(b)  दोनों पद विशेषण  : श्वेत और रक्त = श्वेतरक्त

भला और बुरा  = भलाबुरा

कृष्ण और लोहित = कृष्णलोहित

(c) पहला पद विशेष्य दूसरा विशेषण : श्याम जो सुन्दर है  = श्यामसुन्दर

(d) दोनों पद विशेष्य : आम्र जो वृक्ष है = आम्रवृक्ष

(e) पहला पद उपमान : धन की भाँति श्याम = घनश्याम

बज्र के समान कठोर = बज्रकठोर

(f) पहला पद उपमेय : सिंह के समान नर = नरसिंह

(g) उपमान के बाद उपमेय : चन्द्र के समान मुख = चन्द्रमुख

(h) रूपक कर्मधारय : मुखरूपी चन्द्र = मुखचन्द्र

(i) पहला पद कु : कुत्सित पुत्र = कुपुत्र

  1. नञ तत्पुरुष समास : जिसका पहला पद निषेधवाचक रहे | इसका समस्तपद ‘अ’ या ‘अन’ से शुरू होता है | जैसे –

न ज्ञान = अज्ञान
न अवसर = अनवसर
न अधिकार = अनधिकार आदि |

  1. द्विगु समास (Numeral Compound) : इस समास को संख्यापूर्णपद कर्मधारय कहा जाता है | इसका पहला पद संख्यावाची और दूसरा पद संज्ञा होता है | इसके भी दो भेद होते है-

(a) समाहार द्विगु : समाहार का अर्थ है- समुदाय, इकट्ठा होना या समेटना | जैसे

पंचवटी = पाँच वटों का समाहार
चौराहा = चार राहों का समाहार

(b) उत्तरपद  प्रधान द्विगु : इसका दूसरा पद प्रधान रहता है और पहला पद संख्यावाची | इसमें समाहार नहीं जोड़ा जाता जैसे-

पंचप्रमाण = पाँच प्रमाण

नोट : यदि दोनों पद संख्यावाची हों तो कर्मधारय समास हो जायेगा | जैसे –

छतीस = छः और तीस  इकतीस = एक और तीस
चौतीस = चार और तीस  चौबीस = चार और बीस

  1. मध्यमपदलोपी समास : इसमें बीच के पदों का लोप हो जाया  करता है | पहला और अंतिम पद जुड़कर समस्तपद का निर्माण करता है |

जैसे – छाया प्रद (लोप) तरु  = छायातरू

गोबर से निर्मित (लोप) गणेश = गोबरगणेश

  1. प्रादि तत्पुरुष : इस समास में ‘प्र’ आदि उपसर्गों तथा दूसरे शब्दों का समास होता है | ‘प्र’  उन्हीं के रूप से दूसरे शब्द भी जुड़े रहते है ; परन्तु समास करने पर वे लुप्त हो जाते है | जैसे –

प्रकृष्ट आचार्य = प्राचार्य

  1. उपपद तत्पुरुष : जिस समास का अंतिम पद ऐसा कृदन्त होता है, जिसका स्वतंत्र रूप में (कृदन्त के रूप में) प्रयोग नहीं होता | जैसे –

कुम्भ को करनेवाला = कुंभकार
जल में जनमनेवाला = जलभ|
इन उदाहरणों में ‘कार’ और ‘ज’ दोनों अप्रचलित कृदन्त हैं |

  1. अलुक तत्पुरुष : जिस तत्पुरुष के पहले पद की विभक्ति (कारक-चिह्न) का लोप न होकर उसी में तिरोहित हो जाती है | जैसे –

युद्ध में स्थिर रहनेवाला = युधिष्ठिर
इस उदाहरण में – युद्ध में की जगह पर ‘युधि’ हो गया  है यानी ‘में’ चिह्न मिल गया है |
इसी तरह – चूहे को मरनेवाला = चूहेमार |

  1. मयूरव्यंसकादि तत्पुरुष : इसके समस्तपद का विग्रह करने पर अंतिम पद पहले आ जाता है |

जैसे – 

देशान्तर = भिन्न देश
विषयान्तर = अन्य विषय
एकमात्र = केवल एक

नोट : मध्यमपदलोपी, प्रादि, उपपद, अलुक और मयूरव्यंसकादि का अस्तित्व संस्कृत में है हिंदी में ऐसे उदाहरण बहुत ही काम है |

तत्पुरुष समास का 50 उदाहरण

समस्तपद विग्रह समस्तपद विग्रह
यशोदा यश को देनेवाली आशातीत जिसकी आशा की जाती है
इन्द्रियातीत जहाॅ तक इन्द्रियें की पहुॅच नहीं है कष्टसहिष्णु कष्ट को सह लेनेवाला
वचनातीत जो कहा नहीं जा सकता वर्णनातीत जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता
संकटापन्न संकट को आपन्न (प्राप्त) शोकदग्ध शोक से दग्ध (जला)
कालिदासकृत कालिदास द्वारा कृत ज्ञानयुक्त ज्ञान से युक्त
मनमाना मन से माना गुरूदन्त गुरू से दन्त
गुणयुक्त गुण से युक्त सूरकृत सूर द्वारा कृत
पॉकेटमार पॉकेट (को) मारनेवाला गृहागत गृह को आगत
गिरहकट गिरह (को) काटनेवाला स्वर्गप्राप्त स्वर्ग को प्राप्त
दुःखापन्न दुःख (को) आपन्न शरणागत शरण को आगत
गठकटा गांठ को काटनेवाला संगीतज्ञ संगीत को जाननेवाला
मनोहर मन को हरनेवाला सर्वभक्षी सबको भक्षण करनेवाला
त्रिगुणातीत जो तीनों से परे हो स्थानापन्न स्थान को आपन्न
अनलदग्ध अनल से दग्ध कंटकाकीर्ण कांटों से भरा
क्षुधातुर क्षुधा से आतुर मनः पूत मन से पूत (पवित्र)
रक्तारक्त रक्त से आरक्त विचारगभ्य जहां तक विचार जा सकता है
प्रकृतिप्रदन्त प्रकृति द्वारा प्रदन्त शिरोधार्य जो सिर से धारण करने योग्य हो
अंधकारयुक्त अंधकार से युक्त कलंकयुक्त कलंक से युक्त
वागदन्त वाक से दन्त आतपजीवी आतप (धूप) से जीनेवाला
कामचोर काम से चोर जलसिक्त जल से सिक्त
देहचोर देह से चोर नियमाबद्ध नियम से आबद्ध
प्रेमसिक्त प्रेम से सिक्त मदान्ध मद से अन्ध
मुँहचोर मुँह से चोर रोगग्रस्त रोग से ग्रस्त
मेघाछन्न मेघ से आच्छन्न (घिरा) दुःखसंतप्त दुःख से संतप्त
शोकार्त शोक से आर्त आचारपूत आचार से पूत
कष्टसाध्य कष्ट से साध्य तर्कसंगत तर्क से संगत
रक्तरंजित रक्त से रंगा विद्धिप्रदंत विधि द्वारा प्रदन्त
मुँहमाँगा मुँह से माँगा मनचाहा मन से चाहा
ज्ञानयुक्त ज्ञान से युक्त रेखांकित रेखा से अंकित
कपड़छन कपड़े से छना गुणहीन गुण से हीन
गुणयुक्त गुण से युक्त हस्तलिखित हस्त से लिखित
देवदन्त देव द्वारा दन्त अकालपीडित अकाल से पीड़ित
करुणापूर्ण करुणा से पूर्ण जलावृत्त जल से आवृत
तुलसीकृत तुलसी द्वारा कृत धर्माध धर्म से अन्धा
पददलित पद से दलित फलाविष्टत फल से आवेष्टित
मदमाता मद से माता रसभरा रस से भरा
शोकाकुल शोक से आकुल दुःखार्त दुःख से आर्त
श्रमजीवी श्रम से जीनेवाला शोवापर्ण शिव के लिए अर्पण
समाभवन सभा के  लिए भवन मार्गव्यय मार्ग के लिए व्यय
मालगोदाम माल के लिए गोदाम साधुदक्षिणा साधु के लिए दक्षिणा
पुत्रशोक पुत्र के लिए शोक राहखर्च राह के लिए खर्च
देवालय देव के लिए आलय लोकसभा लोक के लिए सभा
धर्मशाला धर्म के लिए शाला फलाकांक्षी फल के लिए आकांक्षी
विद्यालय विद्या के लिए आलय मंत्रालय मंत्रणा के लिए आलय
युद्धभूमि युद्ध के लिए भूमि हथकड़ी हाथ के लिए कड़ी
प्रयोगशाला प्रयोग के लिए शाला स्नानागार स्नान के लिए आगार
सचिवालय सचिवों के लिए आलय मदिरालय मदिरा के लिए आलय
रसोईघर रसोई के लिए घर स्नानघर स्नान के लिए घर
डाकमहसूल डाक के  महसूल देशभक्ति देश के लिए भक्ति
ब्राह्म्णदेय ब्राह्मण के लिए देय गोशाला गो के लिए शाला
विधानसभा विधान के लिए सभा देवबलि देव के लिए बलि
न्यायालय न्याय के लिए आलय शिवालय शिव के लिए आलय
चिकित्सालय चिकित्सा के लिए आलय सत्याग्रह सत्य के लिए आग्रह
हथघड़ी हाथ के लिए घड़ी शयनागार शयन के लिए आगर
भिक्षाटन भक्षा के लिए अटन (भ्रमण) पुस्तकालय पुस्तक के लिए आलय
आकाशवृत्ति आकाश से प्राप्त वृत्ति कर्तव्यच्युत कर्तव्य से च्युत
विक्रमपूर्ण विक्रम से पूर्ण धनहीन धन से हीन
जातिच्युत जाति से च्युत ईसापूर्व ईसा से पूर्ण
देशनिकाला देश से निकाला अन्नहीन अन्न से हीन
क्रियाहीन क्रिया से हीन जलजात जल से जात
धर्मविमुख धर्म से विमुख ईसापूर्ण ईसा से पूर्ण
पथभ्रष्ट पथ से भ्र्ष्ट आशातीत आशा से परे
ऋणमुक्त ऋण से मुक्त जलरिक्त जल से रिक्त
दयाहीन दया से हीन नेत्रहीन नेत्र से हीन
पापमुक्त पाप से मुक्त मरणोत्तर मरण से उत्तर
रसहीन रस से हीन व्ययमुक्त व्यय से मुक्त
बलहीन बल से हीन मायारिक्त माया से रिक्त
श्रमरहित श्रम से रहित अन्नदान अन्न का दान
वीरकन्या वीर की कन्या राजभवन राजा का भवन
आनंदाश्रम आनंद का आश्रम रामायण राम का अयन
गंगाजल गंगा का जल कृष्णोपासक कृष्ण का उपासक
सूर्योदय सूर्य का उदय चरित्रचित्रण चरित्र का चित्रण
अमरस आम का रस सभापति सभा का पति
गुरुसेवा गुरु की सेवा सेनापति सेना का पति
मृगछौना मृग का छौना राजकमल राजा का कमल
राजकुमारी राजा की कुमारी राष्ट्रपति राष्ट्र का पति
अमृतपात्र अमृत का पात्र उल्कापात उल्का का पात
कन्यादान कन्या का दान त्रिपुरारि त्रिपुर का अरि
प्रेमोपासक प्रेम का उपासक देशसेवा देश की सेवा
राजगृह राजा का गृह विद्यासागर विद्या का सागर
सेनानायक सेना का नायक ग्रामोद्धार ग्राम का द्वार
राजपुत्र राजा का पुत्र हिमालय हिम का आलय
आनंदमठ आनंद का मठ औषधालय औषध का आलय
खलनायक खलो का नायक जलाशय जल का आशय
फलाहार फल का आहार बालुकाराशि बालू का राशि
रत्नागार रत्नो का आगार विद्यार्थी विद्या का अर्थी
विद्याभ्यास विद्या का अभ्यास शांतिदूत शांति का दूत
सेनाध्यक्ष सेना का अध्यक्ष यमुनातट यमुना का तट
आत्महत्या आत्मा की हत्या भारतवासी भारत का वासी
दिनचर्या दिन की चर्या कुलदीप कुल का दीप
भ्रातृस्नेह भ्राता का स्नेह परनिन्दा पर का निंदा
राजनीतिज्ञ राजनीति का ज्ञाता सुखसागर सुख का सागर
कविकुल गुरु कविकुल के गुरु कार्यकर्ता कार्य का कर्ता
जलयान जल का यान दावानल दाव का अनल
नगरपालिका नगर की पालिका पंडितराज पंडितों का राज
भविष्यवक्ता भविष्य का वक्ता मातृहन्ता माता की हत्या करने वाला
गणेश गणों का ईश जननायक जनो का नायक
प्रेमोपहार प्रेम का उपहार भूदान भू का दान
व्यायामशाला व्यायाम की शाला धर्मार्थी धर्म का अर्थी
धूड़दोड़ घोड़ो की दौड़ कनकघट कनक का घट (पड़ा)
भारतरत्न भारत का रत्न यदुवंश यदु का वंश
वनमाली वन का माली तरणितनुजा तरणि की तनुजा
देवकन्या देव की कन्या नगरसेठ नगर का सेठ
वनमानुष वन का मानुष प्रेमसागर प्रेम का सागर
जठरानल जठर (पेट) का अनल देशाटन देश का अटन
पुत्रवधू पुत्र की वधू युगनिर्माता युग का निर्माता
सर्वदमन सबका दमन करनेवाला सिंहशावक सिंह का शावक
हस्तलाघव हाथ की सफाई सन्देहास्पद सन्देह का स्थान
अरण्यरोदन अरण्य (जंगल) में रोदन नरश्रेष्ट नरों में श्रेष्ट
किंकत्तर्व्य विमूढ़ क्या करना चाहिए इस विचार में अक्षर विषयासक्त सर्वसाधारण जो सबमें साधारण रूप से पाया जाता है
पुरुषसिंह पुरुषों में सिंह शास्त्रप्रवीण शास्त्रों प्रवीण
क्षत्रियाधम क्षत्रियों का अधम हरफनमौला हर फन (कला) में मौला
कविश्रेष्ठ कवियों में श्रेष्ट ध्यानमग्न ध्यान में मग्न
गृहप्रवेश गृह में प्रवेश सर्वोत्तम सबों में उत्तम
रणशूर रण में शूर घुड़सवार घोड़े पर सवार
रणधीर रण में धीर जलमग्न जल में मग्न
कलाप्रवीण कला में प्रवीण जगबीती जग पर बीती
कार्यकुशल कार्य में कुशल क्षणभंगुर क्षण में नष्ट होनेवाला
पुरुषोत्तम पुरुषो में उत्तम रणमन्त रण में मन्त (मतवाला)
ग्रामवास ग्राम में वास आत्मनिर्भर आत्म पर निर्भर
शरणागत शरण में आगत मुनिश्रेष्ठ मुनियो में श्रेष्ठ
दानवीर दान का वीर नीतिनिपुण नीति में निपुण
निशाचर निशा में चरनेवाला आपबीती आप पर बीती
फ्लासक्त फल में आसक्त

apathit gadhyansh

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