July 6, 2022

(Samas) समास की परिभाषा, समास के भेद प्रकार और उदाहरण

(Samas) समास की परिभाषा, समास के भेद प्रकार और उदाहरण हिंदी व्याकरण में समास (Samas in hindi) कुछ महत्वपूर्ण भागों में से एक भाग है। यहाँ हम जानेंगे समास की परिभाषा,समास विग्रह: समास कितने प्रकार के होते हैं? और समास के उदाहरण। Samas ki paribhasha, Samas ke bhed, samas kitne prakar ke hote hain?, इन सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इस लेख में मिलेंगे, Samas is called compound in English.

हिंदी व्याकरण में अलग अलग कक्षा 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 तक सभी प्रकार के समास को आरोही क्रम में व्यक्त किया गया है।

समास की परिभाषा, समास के भेद प्रकार और उदाहरण

समास की परिभाषा या समास किसे कहते हैं?

‘समास’ का शाब्दिक अर्थ है – संक्षेप | अर्थात दो या दो से अधिक शब्दों के समूह को संक्षिप्त रूप को समास कहते हैं|

समास का एक उदाहरण यह है –

  1. राजा का कुमार सख्त बीमार था | =  राजकुमार बीमार था |

उपर्युक्त वाक्यों में हम देख रहे हैं कि ‘राजा का कुमार’ का संक्षिप्त रूप ‘राजकुमार’ हो गया है |

अर्थात दो या अधिक शब्दों  विभक्ति-चिह्नों अथवा अन्य प्रत्ययों को छोड़कर आपस में मिल जाना ही ‘समास’ कहलाता  है |

तात्पर्य यह कि समास में कम-से-कम दो पदों का योग होता है | जब वे दो या अनेक पद एक हो जाते है तब समास होता है |

समास के मुख्यतः चार प्रकार है और इन प्रकारों के भी कई उपभेद हुआ करते है | देखे –

  1. अव्ययीभाव समास (Adverbial compound)
  2. तत्पुरुष समास (Determinative compound)
  3. बहुव्रीहि समास (Attributive compound)
  4. द्वंद्व समास (Copulative compound)

Samas

समास के सभी भागों को विस्तृत में नीचे दिए गए लिंक में दिया है, आप समास के प्रकार तथा समास विग्रह यहाँ पढ़ सकते हैं

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. बहुव्रीहि समास
  4. द्वंद्व समास

समास विग्रह: किसे कहते हैं?

सामासिक शब्दों के मध्य शब्दों को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है।

समास होने के पूर्व पदों के रूप को (बिखरे रूप) ‘समास-विग्रह’ और समास होने के बाद बने संक्षिप्त रूप को ‘समस्तपद’ या ‘सामासिक पद’ कहते है|

ऊपर दिए गए उदाहरणों में ‘राजा का कुमार’ – समास-विग्रह और ‘राजकुमार’ को हम ‘समस्तपद’ कहेंगे |

अन्य उदाहरण –

रसोई के लिए घर = समास विग्रह है
रसोईघर – समास

द्विगु समास

द्विगु समास (Numeral Compound) : इस समास को संख्यापूर्णपद कर्मधारय कहा जाता है | इसका पहला पद संख्यावाची और दूसरा पद संज्ञा होता है | इसके भी दो भेद होते है-

(a) समाहार द्विगु : समाहार का अर्थ है- समुदाय, इकट्ठा होना या समेटना |

जैसे
पंचवटी = पाँच वटों का समाहार
चौराहा = चार राहों का समाहार 

(b) उत्तरपद  प्रधान द्विगु : इसका दूसरा पद प्रधान रहता है और पहला पद संख्यावाची | इसमें समाहार नहीं जोड़ा जाता

जैसे- 
पंचप्रमाण = पाँच प्रमाण

नोट : यदि दोनों पद संख्यावाची हों तो कर्मधारय समास हो जायेगा |

जैसे – 
छतीस = छः और तीस  इकतीस = एक और तीस
चौतीस = चार और तीस  चौबीस = चार और बीस
hindi vyakaran

समस्तपद विग्रह  समस्तपद विग्रह 
अठकोना आठ कोनों का समाहार अष्टाध्यायी आठ अध्यायों का समाहार
चवन्नी चार आनों का समाहार चौमास चार मासों का समाहार
छमाही छह माहों का समाहार अठन्नी आठ आनो का समाहार
अष्टधातु आठ धातुओ का समाहार चौराहा चार राहों का समाहार
त्रिवेणी तीन वेणियों का समाहार तिकोना तीन कोनों का समाहार
तिमाही तीन माहो का समाहार त्रिभुवन तीन भुवनों (संसार) का समाहार
त्रिकाल तीन कालों का समाहार दुअन्नी दो आनो का समाहार
नवग्रह नौ ग्रहों का समाहार नवरत्न नौ रत्नों का समाहार
पंचवटी पाँच वटों का समाहार पंचवदन पाँच वदनों का समाहार
षडरस षट रसों का समाहार सप्तशती सात सौ का समाहार
चतुर्वेद चार वेदों का समाहार पंचतंत्र पाँच तंत्रों का समाहार
दुपहर दूसरा पहर पञ्चहत्थड़ पाँच हत्थड़ (हैंडल)
दुसूती दो सुतोवाला त्रिनेत्र तीन लोकों का समाहार
त्रिलोक तीन लोकों का समाहार त्रिफला तीन फलों का समाहार
नवरात्रि नौ रातों का समाहार त्रिफला तीन फलों का समाहार
सतसई सात सौ औ का समाहार पंसेरी पाँच सेरों का समाहार
द्विगु दो गौओ का समाहार शतांश शत का अंश
पंचप्रमाण पाँच प्रमाण (नाप) दुधारी दो धारोवाली

 उपपद तत्पुरुष 

जिस समास का अंतिम पद ऐसा कृदन्त होता है, जिसका स्वतंत्र रूप में (कृदन्त के रूप में) प्रयोग नहीं होता |

जैसे –
कुम्भ को करनेवाला = कुंभकार
जल में जनमनेवाला = जलभ|

इन उदाहरणों में ‘कार’ और ‘ज’ दोनों अप्रचलित कृदन्त हैं |

समस्तपद विग्रह  समस्तपद विग्रह 
अंडज अंडे से जन्म लेनेवाला जलज जल में जनमनेवाला
दिवाकर दिवा करनेवाला पादप पाद (जड़) से पीनेवाला
प्रभाकर प्रभा करनेवाला अग्रज आगे जन्म लेनेवाला
अग्रशोची आगे की सोचनेवाला अनुज पीछे जन्म लेनेवाला
अनुचर पीछे-पीछे चलनेवाला अल्पभाषी कम बोलनेवाला
उरग उर के बल करनेवाला जलद जल देनेवाला
धनद धन देनेवाला पंकज पंक में जन्म लेनेवाला
पिण्डज पिंड से जन्म लेनेवाला महीप मही (पृथ्वी) को पालनेवाला
अग्रणी जो आगे चलता है अंत्यज अंत्य (नीच) से जन्म लेनेवाला
अवश्यंभावी अवश्य होनेवाला अतलस्पर्शी अत्यन्त गहराई  पहुँचनेवाला
कलाकार कला को करनेवाला भाषाविद भाषा को जाननेवाला
कृतघ्न किये हुए को न माननेवाला गृहस्थ घर में रहनेवाला
दीर्घजीवी अधिक दिन जीनेवाला द्रवीभूत जो पहले द्रव न था, अब द्रव हो गया
स्तनपायी थान पिलाने या पीनेवाला प्राणी बहुभाषाभाषी बहुत-सी भाषाए बोलनेवाला
द्वारपाल द्वार की रक्षा करनेवाला समदर्शी सबको समान देखनेवाला
रोमांचकारी रोमांचित करनेवाला बहुदर्शी जो बहुत देख चूका है
दुर्वह जिसका वहन (ढोना) कठिन हो जानलेवा जान लेनेवाला
सव्यसाची बाएँ हाथ से भी बाण जाननेवाला महीधर माहि (पृथ्वी) को धारण करनेवाला
विशेषज्ञ विशेष रूप से जाननेवाला समीकरण जो सम नहीं है, उसे सम करना
प्रियंवद प्रिय बोलनेवाला कलाविद कला को जाननेवाला
कृतज्ञ किए हुए को जाननेवाला दुस्तर जिसका पर पाना कठिन हो
प्राणदा प्राण देनेवाली हितैषी हिट चाहनेवाला
प्रियदर्शी प्रिय दिखाई देनेवाला प्रियंवदा प्रिय बोलने वाली
द्विज दो बात जन्म लेनेवाला शास्त्रज्ञ शास्त्र जाननेवाला

मध्यमपदलोपी समास 

इसमें बीच के पदों का लोप हो जाया करता है | पहला और अंतिम पद जुड़कर समस्तपद का निर्माण करता है |

जैसे – छाया प्रद तरु  = छायातरू

समस्तपद विग्रह  समस्तपद विग्रह 
कीर्तिमंदिर कीर्ति से बना मंदिर जेबघड़ी जेब में रहनेवाली घड़ी
दहीबाड़ा दही में डूबा बाड़ा पर्णशाला पर्ण (पत्ता) से निर्मित शाला
फुलोड़ी फूली हुई बड़ी स्वर्णहार स्वर्ण से निर्मित हार
छायातरू छाया प्रद तरु घोड़ागाड़ी घोड़े से चलनेवाली गाड़ी
डाकगाड़ी डाक ले जानेवाली गाड़ी पकौड़ी पकी हुई बड़ी
स्वर्णककण स्वर्ण निर्मित कंकण मर्यादापुरुष मर्यादा रक्षक पुरुष
जटाशंकर जटा युक्त शंकर शाकपार्थिव शाकप्रिय पार्थिव
देवब्राह्म्ण देव् पूजक ब्राह्मण

प्रादि तत्पुरुष 

इस समास में ‘प्र’ आदि उपसर्गों तथा दूसरे शब्दों का समास होता है | ‘प्र’  उन्हीं के रूप से दूसरे शब्द भी जुड़े रहते है ; परन्तु समास करने पर वे लुप्त हो जाते है |

जैसे – प्रकृष्ट आचार्य = प्राचार्य

समस्तपद विग्रह  समस्तपद विग्रह 
अधमरा आधा मरा प्राचार्य प्रकृष्ट आचार्य
अनुभूत जिसका अनुभव किया जा चूका है अतिवृष्टि बहुत अधिक वृष्टि
अनुकरणीय अनुकरण करने योग्य अंतःपुर भीतर का नगर
अनुमित जिसका अनुमान किया गया है आपान इकट्ठा होकर पीना
निगीर्ण निगला हुवा परित्यक्त छोड़ दिया गया
पुरस्कार आगे बढ़ने के लिए दिया गया इनाम प्रतिमूर्ति किसी आकृति की नकल
प्रातराश प्रायः काल का जलपान प्रत्युपकार उपकार के बदले किया गया उपकार
प्रपर्ण जिसके सभी पटे झड़ चुके है विक्रेता विक्रय करनेवाला
सदाव्रत जहाँ सदा धर्मार्थ खाद्य-पेय बटता है सुप्राप्य सरलता से पाने योग्य
अनुयोजक अपील करनेवाला अत्युक्ति बढ़ा-चढ़ाकर कहना
अंतभार्य भीतर होना या कर लेना अभिज्ञ अच्छी तरह जाननेवाला
निर्देशक निर्देशन करनेवाला प्रत्यागत लौटकर आया हुआ
विज्ञ विशेष रूप से जाननेवाला स्वयंसेवक स्वेच्छा से सेवा करनेवाला

नञ तत्पुरुष 

समस्तपद विग्रह  समस्तपद विग्रह 
अकर्म न कर्म अगोचर न गोचर
अचित्य न चिंत्य अछूत न छूत
अजात न जात अधर्म न धर्म
अकाल न काल अचल न चल
अचेतन चेतन अज्ञान न ज्ञान
अदृश्य न दृश्य अधीर न धीर
अनजान न जान अनादि न आदि
अनावश्यक न आवश्यक अनिच्छुक न इच्छुक
अनपढ़ न पढ़ा अंमगल न मंगल
अव्यय न अव्यय अस्थिर न स्थिर
अविधा न विद्या अखाद्य न खाद्य
अप्रमेय न प्रमेय अपरिमेय न परिमेय
अमोघ न मोघ अवैध न वेध
नामुमकिन न मुमकिन गैरकानूनी न क़ानूनी
अनदेखा न देखा अनाहार न आचार
अनिष्ट न इष्ट अपवित्र न पवित्र
अलौकिक न लौकिक अब्राह्राण न ब्राह्राण
अजेय न जेय अनावृष्टि न वृष्टि
असाध्य न साध्य अभेदय न भेदय
अमानुषिक न मानुषिक अवैतनिक न वैतनिक
अव्याहत न व्याहत असंभव न सम्भव
नास्तिक न आस्तिक

samas in hindi

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